बुध अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रं
बुध ग्रह के अष्टोत्तर शतनाम अर्थात्
१०८ नाम स्तोत्रं का श्रद्धापूर्वक और विधि-विधान से जाप करने से व्यक्ति सभी
मनोकामनाएं पूरी कर सकता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है। बुध देव की कृपा से
सुख-समृद्धि और बुध से सम्बंधित सभी दोषों के निवारण होता है ।
बुधाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
श्रीबुधाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्-
बुध (Mercury), सौरमंडल के आठ ग्रहों
में सबसे छोटा और सूर्य का सबसे निकटतम ग्रह है। इसका परिक्रमण काल लगभग 88 दिन है। पृथ्वी से देखने पर, यह अपनी कक्षा के
ईर्दगिर्द 116 दिवसो में घूमता नजर आता है जो कि ग्रहों में
सबसे तेज है। गर्मी बनाए रखने के लिहाज से इसका वायुमण्डल चूँकि करीब-करीब नगण्य
है, बुध का भूपटल सभी ग्रहों की तुलना में तापमान का
सर्वाधिक उतार-चढाव महसूस करता है, जो कि 100 K (−173
°C; −280 °F) रात्रि से लेकर भूमध्य रेखीय क्षेत्रों में दिन के समय
700 K (427 °C; 800 °F) तक है। वहीं ध्रुवों के तापमान
स्थायी रूप से 180 K (−93 °C; −136 °F) के नीचे है। बुध के
अक्ष का झुकाव सौरमंडल के अन्य किसी भी ग्रह से सबसे कम है (एक डीग्री का करीब 1⁄30),
परंतु कक्षीय विकेन्द्रता सर्वाधिक है। बुध ग्रह अपसौर पर उपसौर की
तुलना में सूर्य से करीब 1.5 गुना ज्यादा दूर होता है। बुध
की धरती क्रेटरों से अटी पडी है तथा बिलकुल हमारे चन्द्रमा जैसी नजर आती है,
जो इंगित करता है कि यह भूवैज्ञानिक रूप से अरबो वर्षों तक मृतप्राय
रहा है।
बुध बीज मन्त्र - ॐ ब्राँ ब्रीं
ब्रौं सः बुधाय नमः ॥
श्रीबुधाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
budha Ashtottar shatanaam stotram
बुध १०८ नाम स्तोत्र
बुधो बुधार्चितः सौम्यः सौम्यचित्तः
शुभप्रदः ।
दृढव्रतो दृढबल श्रुतिजालप्रबोधकः ॥
१॥
सत्यवासः सत्यवचा
श्रेयसाम्पतिरव्ययः ।
सोमजः सुखदः श्रीमान्
सोमवंशप्रदीपकः ॥ २॥
वेदविद्वेदतत्त्वज्ञो
वेदान्तज्ञानभास्करः ।
विद्याविचक्षण विदुर्
विद्वत्प्रीतिकरो ऋजः ॥ ३॥
विश्वानुकूलसञ्चारी
विशेषविनयान्वितः ।
विविधागमसारज्ञो वीर्यवान्
विगतज्वरः ॥ ४॥
त्रिवर्गफलदोऽनन्तः
त्रिदशाधिपपूजितः ।
बुद्धिमान् बहुशास्त्रज्ञो बली
बन्धविमोचकः ॥ ५॥
वक्रातिवक्रगमनो वासवो वसुधाधिपः ।
प्रसादवदनो वन्द्यो वरेण्यो
वाग्विलक्षणः ॥ ६॥
सत्यवान् सत्यसंकल्पः सत्यबन्धिः
सदादरः ।
सर्वरोगप्रशमनः सर्वमृत्युनिवारकः ॥
७॥
वाणिज्यनिपुणो वश्यो वातांगी
वातरोगहृत् ।
स्थूलः स्थैर्यगुणाध्यक्षः
स्थूलसूक्ष्मादिकारणः ॥ ८॥
अप्रकाशः प्रकाशात्मा घनो गगनभूषणः ।
विधिस्तुत्यो विशालाक्षो
विद्वज्जनमनोहरः ॥ ९॥
चारुशीलः स्वप्रकाशो चपलश्च
जितेन्द्रियः ।
उदऽग्मुखो मखासक्तो मगधाधिपतिर्हरः
॥ १०॥
सौम्यवत्सरसञ्जातः सोमप्रियकरः सुखी
।
सिंहाधिरूढः सर्वज्ञः शिखिवर्णः
शिवंकरः ॥ ११॥
पीताम्बरो पीतवपुः
पीतच्छत्रध्वजांकितः ।
खड्गचर्मधरः कार्यकर्ता कलुषहारकः ॥
१२॥
आत्रेयगोत्रजोऽत्यन्तविनयो
विश्वपावनः ।
चाम्पेयपुष्पसंकाशः चारणः चारुभूषणः
॥ १३॥
वीतरागो वीतभयो विशुद्धकनकप्रभः ।
बन्धुप्रियो बन्धयुक्तो
वनमण्डलसंश्रितः ॥ १४॥
अर्केशानप्रदेषस्थः
तर्कशास्त्रविशारदः ।
प्रशान्तः प्रीतिसंयुक्तः प्रियकृत्
प्रियभाषणः ॥ १५॥
मेधावी माधवासक्तो मिथुनाधिपतिः
सुधीः ।
कन्याराशिप्रियः कामप्रदो
घनफलाश्रयः ॥ १६॥
बुधाष्टोत्तरशतनामावली- ॐ
बुधाय नमः । ॐ बुधार्चिताय नमः । ॐ सौम्याय नमः । ॐ सौम्यचित्ताय नमः । ॐ
शुभप्रदाय नमः । ॐ दृढव्रताय नमः । ॐ दृढफलाय नमः । ॐ श्रुतिजालप्रबोधकाय नमः । ॐ
सत्यवासाय नमः । ॐ सत्यवचसे नमः । ॐ श्रेयसां पतये नमः । ॐ अव्ययाय नमः । ॐ सोमजाय
नमः । ॐ सुखदाय नमः । ॐ श्रीमते नमः । ॐ सोमवंशप्रदीपकाय नमः । ॐ वेदविदे नमः । ॐ
वेदतत्त्वाशाय नमः । ॐ वेदान्तज्ञानभास्कराय नमः । ॐ विद्याविचक्षणाय नमः । ॐ
विदुषे नमः । ॐ विद्वत्प्रीतिकराय नमः । ॐ ऋजवे नमः । ॐ विश्वानुकूलसंचाराय नमः ।
ॐ विशेषविनयान्विताय नमः । ॐ विविधागमसारज्ञाय नमः । ॐ वीर्यवते नमः । ॐ
विगतज्वराय नमः । ॐ त्रिवर्गफलदाय नमः । ॐ अनन्ताय नमः । ॐ त्रिदशाधिपपूजिताय नमः
। ॐ बुद्धिमते नमः । ॐ बहुशास्त्रज्ञाय नमः । ॐ बलिने नमः । ॐ बन्धविमोचकाय नमः । ॐ
वक्रातिवक्रगमनाय नमः । ॐ वासवाय नमः । ॐ वसुधाधिपाय नमः । ॐ प्रसन्नवदनाय नमः । ॐ
वन्द्याय नमः । ॐ वरेण्याय नमः । ॐ वाग्विलक्षणाय नमः । ॐ सत्यवते नमः । ॐ
सत्यसंकल्पाय नमः । ॐ सत्यबन्धवे नमः । ॐ सदादराय नमः । ॐ सर्वरोगप्रशमनाय नमः । ॐ
सर्वमृत्युनिवारकाय नमः । ॐ वाणिज्यनिपुणाय नमः । ॐ वश्याय नमः । ॐ वाताङ्गाय नमः
। ॐ वातरोगहृते नमः । ॐ स्थूलाय नमः । ॐ स्थैर्यगुणाध्यक्षाय नमः । ॐ
स्थूलसूक्ष्मादिकारणाय नमः । ॐ अप्रकाशाय नमः । ॐ प्रकाशात्मने नमः । ॐ घनाय नमः ।
ॐ गगनभूषणाय नमः । ॐ विधिस्तुत्याय नमः । ॐ विशालाक्षाय नमः । ॐ विद्वज्जनमनोहराय
नमः । ॐ चारुशीलाय नमः । ॐ स्वप्रकाशाय नमः । ॐ चपलाय नमः । ॐ जितेन्द्रियाय नमः ।
ॐ उदङ्मुखाय नमः । ॐ मखासक्ताय नमः । ॐ मगधाधिपतये नमः । ॐ हरये नमः । ॐ
सौम्यवत्सरसंजाताय नमः । ॐ सोमप्रियकराय नमः । ॐ महते नमः । ॐ सिंहाधिरूढाय नमः ।
ॐ सर्वज्ञाय नमः । ॐ शिखिवर्णाय नमः । ॐ शिवंकराय नमः । ॐ पीताम्बराय नमः । ॐ
पीतवपुषे नमः । ॐ पीतच्छत्रध्वजाङ्किताय नमः । ॐ खड्गचर्मधराय नमः । ॐ
कार्यकर्त्रे नमः । ॐ कलुषहारकाय नमः । ॐ आत्रेयगोत्रजाय नमः । ॐ अत्यन्तविनयाय
नमः । ॐ विश्वपवनाय नमः । ॐ चाम्पेयपुष्पसंकाशाय नमः । ॐ चारणाय नमः । ॐ
चारुभूषणाय नमः । ॐ वीतरागाय नमः । ॐ वीतभयाय नमः । ॐ विशुद्धकनकप्रभाय नमः । ॐ बन्धुप्रियाय नमः । ॐ बन्धुयुक्ताय नमः
। ॐ वनमण्डलसंश्रिताय नमः । ॐ अर्केशाननिवासस्थाय नमः । ॐ तर्कशास्त्रविशारदाय नमः
। ॐ प्रशान्ताय नमः । ॐ प्रीतिसंयुक्ताय नमः । ॐ प्रियकृते नमः । ॐ प्रियभूषणाय
नमः । ॐ मेधाविने नमः । ॐ माधवसक्ताय नमः । ॐ मिथुनाधिपतये नमः । ॐ सुधिये नमः । ॐ
कन्याराशिप्रियाय नमः । ॐ कामप्रदाय नमः । ॐ घनफलाश्रयाय नमः । ॥१-१६॥
श्रीबुधाष्टोत्तर शतनामस्तोत्र महात्म्यम्
बुधस्येवम्प्रकारेण
नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ।
सम्पूज्य विधिवत्कर्ता
सर्वान्कामानवाप्नुयात् ॥ १७॥
जो व्यक्ति इस प्रकार विधि-विधान से
बुध के १०८ नामों का स्मरण और पूजा करता है, वह
सभी इच्छाओं (मनोकामनाओं) को पूरी कर लेता है और बुध ग्रह से संबंधित शुभ फल
प्राप्त करता है ।
॥ इति श्रीबुधाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

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