शिवा स्तोत्र
इस शिवा स्तोत्र का पाठ करने से दुःखनाश, पुत्रलाभ, सुख, उन्नति, सर्वकल्याणकर्तृत्व, भयनाश, महाअभ्युदय, नानारोग आदि का नाश होता है।
शिवास्तोत्रम्
Shiva stotram
शिवास्तोत्रं
शिवा स्तोत्रम्
शिवास्तोत्र
शिवारूपधरे देवि कामकालि नमोऽस्तु
ते ।
उल्कामुखि ललज्जिह्वे घोररावे
शृगालिनि ॥ १११ ॥
शिवारूप को धारण करने वाली कामकाली देवि उल्कामुखि, ललत् जिह्वावाली, घोरशब्द करने वाली श्रृंगालिनि! तुमको नमस्कार है ।
श्मशानवासिनि प्रेते
शवमांसप्रियेऽनघे ।
अरण्यचारिणि शिवे फेरो जम्बूकरूपिणि
॥ ११२ ॥
श्मशानवासिनि प्रेते शवमांसप्रिये
अनघे अरण्यचारिणि शिवे फेरो जम्बूकरूपिणि ! तुमको नमस्कार है ।
नमोऽस्तु ते महामाये जगत्तारिणि
कालिके ।
मातङ्गि कुक्कुटे रौद्र कालकालि
नमोऽस्तु ते ॥ ११३ ॥
महामाये जगत्तारिणि कालिके ! तुमको
नमस्कार है । मातङ्गि कुक्कुटे रौद्रि कालकालि ! तुम्हें नमस्कार है ।
सर्वसिद्धिप्रदे देवी भयङ्करि
भयावहे ।
प्रसन्ना भव देवेशि मम भक्तस्य
कालिके ॥ ११४ ॥
सर्वसिद्धिप्रदे भयङ्करि भयावहे देवेशि
कालिके ! आप मेरे भक्त के ऊपर प्रसन्न हो जाओ ।
संसारतारिणि जये जय सर्वशुभङ्करि ।
विस्त्रस्तचिकुरे चण्डे चामुण्डे
मुण्डमालिनि ॥ ११५ ॥
संहारकारिणि क्रुद्धे सर्वसिद्धिं
प्रयच्छ मे ।
संसारतारिणि,
जयशीले, सब प्रकार का शुभ करने वाली, खुले बिखरे केशों वाली, चण्डे, चामुण्डे, मुण्डमाला धारण करने वाली, संहारकारिणि, क्रुद्धे मुझे सर्वसिद्धि दो ।
दुर्गे किराति शबरि प्रेतासनगतेऽभये
॥ ११६ ॥
अनुग्रहं कुरु सदा कृपया मां विलोकय
।
हे दुर्गे,
किराति शबरि प्रेतासन पर आरूढ़ अभये मेरे ऊपर कृपा करो । कृपापूर्वक
मुझे देखो ।
राज्यं प्रयच्छ विकटे वित्तमायुः
सुतान् स्त्रियम् ॥ ११७ ॥
शिवाबलिविधानेन प्रसन्ना भव फेरवे ।
नमस्तेऽस्तु नमस्तेऽस्तु
नमस्तेऽस्तु नमो नमः ॥ ११८ ॥
हे विकटे ! मुझे राज्य धन आयु पुत्र
और स्त्री दो । शिवाबलि के विधान से प्रसन्न हो जाओ । फेरुरूपिणी तुम्हें नमस्कार
है बार-बार नमस्कार है ।
॥ इति: महाकालसंहितायां शिवास्तोत्रं नाम चतुर्थः पटलः ॥ ४ ॥
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