पुरुषोत्तम स्तुति
एकाग्रचित्त से ब्रह्माजी कृत भगवान्
पुरुषोत्तम की स्तुति करने से निर्मल ज्ञान की प्राप्ति होती है ।
पुरुषोत्तम स्तुति
Purushottam stuti
ब्रह्माकृतं पुरुषोत्तम स्तुति:
पुरुषोत्तमस्तुति
पुरुषोत्तम स्तवन
ब्रह्मोवाच
ॐ नमो वेदनिधये शास्त्राणां निधये
नमः ।
विज्ञाननिधये नित्यं कर्मणां निधये
नमः ॥१॥
ब्रह्माजी बोले - जो वेद,
शास्त्र, विज्ञान और कर्मों की निधि हैं,
उन ॐकार- प्रतिपाद्य परमेश्वर को मेरा बार - बार नमस्कार है ।
विद्याधराय देवाय वागीशाय नमो नमः ।
अचिन्त्याय नमो नित्यं सर्वज्ञाय
नमो नमः ॥२॥
समस्त विद्याओं को धारण करनेवाले
वाणीपति भगवान को प्रणाम है । अचिन्त्य एवं सर्वज्ञ परमेश्वर को नित्य बारंबार
नमस्कार है ।
अमूर्तिस्त्वं महाबाहो
यज्ञमूर्तिरधोक्षज ।
साम्नां मूर्तिस्त्वमेवाद्य सर्वदा
सर्वरुपवान् ॥३॥
महाबाहो अधोक्षज ! आप निराकार एवं
यज्ञस्वरुप हैं । आप ही साममूर्ति एवं सदा सर्वरुपधारी हैं ।
सर्वज्ञानमयोऽसि त्वं हदि
ज्ञानमयोऽच्युत ।
देहि मे त्वं सर्वज्ञानं देवदेव नमो
नमः ॥४॥
अच्युत ! आप सर्वज्ञानमय हैं;
आप सबके हदय में ज्ञानरुप में विराजमान हैं । देवदेव ! आप मुझे सब
प्रकार का ज्ञान दीजिये; आपको बारंबार नमस्कार है
इति श्रीनरसिंहपुराणे ब्रह्माकृतं पुरुषोत्तम स्तुति: नाम सप्तत्रिशोऽध्यायः ॥

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