सरस्वती नाम स्तोत्र
सरस्वती नाम स्तोत्र देवी सरस्वती
के विभिन्न नामों का एक स्तोत्र है, जिसका
पाठ करने से ज्ञान, विद्या, बुद्धि, एकाग्रता, कला और रचनात्मकता में निखार की प्राप्ति
होती है। इसे द्वादश नाम स्तोत्र भी कहा जाता है और इसमें सरस्वती के १६ नामों का
वर्णन है, जिनके नित्य पाठ से माता प्रसन्न होती हैं।
सरस्वतीनामस्तोत्र
Names of Saraswati Stotram
श्री सरस्वती नाम स्तोत्र
सरस्वत्याः प्रसादेन,
काव्यं कुर्वन्ति मानवाः ।
तस्मान्निश्चल भावेन,
पूजनीया सरस्वती । । १ । ।
श्री सरस्वती के प्रसाद से सभी मनुष्य
काव्य को पूर्ण करते हैं, इसलिए वह सरस्वती
देवी निश्चलभाव से सदा पूजनीय है।
श्री सर्वज्ञ-मुखोत्पन्ना,
भारती बहुभाषिणी ।
अज्ञान तिमिरं हन्ति,
विद्या बहु विकासिनी । । २ । ।
जो श्रीसर्वज्ञ वीतराग प्रभु के मुख
कमल से उत्पन्न हुई हैं, जो अनेक भाषारूप
हैं अर्थात् जो विविध प्रकार की विद्याओं का विकास करके अज्ञान रूपी अन्धकार को
नष्ट करने वाली हैं, ऐसी हे सरस्वती देवी। तुम सदा ही हम सब
की रक्षा करो।
सरस्वती मया दृष्टा,
दिव्याकमल लोचना ।
हंस स्कन्ध समारूढा,
वीणा पुस्तक धारिणी ।।३।।
( जो अनेक विद्याओं का विकास करने
वाली हैं) जिनके नेत्र कमल के समान दिव्य एवं अत्यन्त सुन्दर हैं,
जो हंसपक्षी पर सवार हैं, जो अपने हाथों में
वीणा और पुस्तक धारण किये हुई हैं, ऐसी श्री सरस्वती देवी को
मैंने देखा, अर्थात् ऐसी भव्य सरस्वती देवी के दर्शन का
सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ।
प्रथमं भारती नाम,
द्वितीयं च सरस्वती ।
तृतीयं शारदा देवी,
चतुर्थ हंसगामिनी ।।४ ॥
सरस्वती का पहला नाम भारती,
दूसरा सरस्वती, तीसरा शारदा देवी और चौथा
हंसगामिनी है।
पञ्चमं विदुषां माता,
षष्ठं वागीश्वरी तथा ।
कुमारी सप्तमं प्रोक्तं,
अष्टमं ब्रह्मचारिणी ।।५।।
पाँचवां विद्वज्जनों की माता,
छठा वागीश्वरी, सातवाँ कुमारी और आठवाँ
ब्रह्मचारिणी है।
नवमं च जगन्माता,
दशमं ब्राह्मणी तथा ।
एकादशं तु ब्रह्माणी,
द्वादशं वरदा भवेत् ।।६।।
नौवां जगन्माता,
दसवां ब्राह्मिणी, ग्यारहवां ब्रह्माणी और
बारहवां वरदा है।
वाणी त्रयोदशं नाम,
भाषा चैव चतुर्दशं ।
पंचदशं च श्रुतदेवी,
षोडशं गौर्निगद्यते ।।७।।
तेरहवां वाणी,
चौदहवां भाषा, पन्द्रहवां श्रुत देवी और
सोलहवां गौर्निगद्यते - इस प्रकार श्री सरस्वती देवी के नाम हैं।
श्री सरस्वती नाम स्तोत्र फलश्रुति:
एतानि श्रुतनामानि प्रातरुत्थाय यः
पठेत् ।
तस्य संतुष्यति माता,
शारदा वरदा भवेत् । ८ ।।
उपर्युक्त सरस्वती के नामों का जो
मनुष्य प्रातः उठकर पाठ करता है, उसके ऊपर
सरस्तवी माता संतुष्ट होती हैं। और उसके सकल मनोरथों को पूर्ण करती हैं।
सरस्वती नमस्तुभ्यं,
वरदे कामरूपिणी ।
विद्यारम्भं करिष्यामि,
सिद्धि र्भवतु मे सदा ।। ९ ।।
हे सरस्वती देवी! तुम इष्ट को पूर्ण
करने के लिए कामरूप हो, अत: तुम्हें हमारा
नमस्कार हो । हे देवी! मैं विद्यारम्भ करूंगा, इसलिए आप
सहायक हों जिससे कि हमारी सिद्धि सदा होती रहे ।
सरस्वती द्वादशनाम स्तोत्र
यह स्तोत्र कई रूपों में उपलब्ध है,
जिसमें सरस्वती के १२ नामों का उल्लेख करने वाला 'द्वादश नाम स्तोत्र' और अन्य स्तोत्र भी शामिल है।
सरस्वतीद्वादशनामस्तोत्रम्
सरस्वतीमहं वन्दे
वीणापुस्तकधारिणीम् ।
हंसवाहसमायुक्तां विद्यादानकरीं मम
॥ १॥
मैं वीणा और पुस्तक धारण करने वाली,
हंस पर सवार और मुझे विद्या प्रदान करने वाली देवी सरस्वती की वंदना
करता हूँ।
प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च
सरस्वती ।
तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं
हंसवाहिनी ॥ २॥
पश्चमं जगति ख्याता षष्ठं वाणीश्वरी
तथा ।
कौमारी सप्तमं प्रोक्ता अष्टमं
ब्रह्मचारिणी ॥ ३॥
नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी
।
एकादशं क्षुद्रघण्टा द्वादशं
भुवनेश्वरी ॥ ४॥
ब्राह्मी द्वादशनामानि त्रिसन्ध्यं
यः पठेन्नरः ।
सरस्वती के बारह नाम: भारती, सरस्वती,
शारदा देवी, हंसवाहिनी, जगतीख्याता, वागीश्वरी, कौमारी, ब्रह्मचारिणी,
बुद्धिधात्री, वरदायिनी, क्षुद्रघण्टा, भुवनेश्वरी ।
सरस्वती १२ नाम स्तोत्र फलश्रुति:
सर्वसिद्धिकरी तस्य प्रसन्ना
परमेश्वरी ।
सा मे वसतु जिह्वाग्रे ब्रह्मरूपा
सरस्वती ॥ ५॥
जो व्यक्ति इन ब्रह्म रूप वाली
सरस्वती के बारह नामों को नित्य त्रिसंध्यं (सुबह, दोपहर, शाम) पढ़ता है, उस पर परमेश्वरी
(माँ सरस्वती) प्रसन्न होती हैं और उसे सभी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं, जिससे उनकी वाणी पर ज्ञान रूपी सरस्वती का वास होता है।
इति श्री सरस्वतीनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

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