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परशुराम स्तोत्र

परशुराम स्तोत्र

इस परशुराम स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों में साहस, आत्मबल, अनुशासन, और न्याय की भावना उत्पन्न होती है। यह स्तोत्र उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, अन्याय का सामना कर रहे हैं या आत्मबल में वृद्धि करना चाहते हैं।

परशुराम स्तोत्र

श्री परशुराम स्तोत्रम्

Shri Parshuram Stotram

श्रीपरशुराम स्तोत्रं

श्री परशुराम स्तोत्र हिंदी अनुवाद सहित

परशुराम स्तोत्र

कराभ्यां परशुं चापं दधानं रेणुकात्मजं ।

जामदग्न्यं भजे रामं भार्गवं क्षत्रियान्तकं ॥ १ ॥

अपने हाथों में परशु और धनुष धारण करने वाले, रेणुका के पुत्र, जमदग्नि के राम, क्षत्रियों का संहार करने वाले भगवान को मैं नमन करता हूँ ।

नमामि भार्गवं रामं रेणुका चित्तनन्दनं ।

मोचितंबार्तिमुत्पातनाशनं क्षत्रनाशनम् ॥ २ ॥

मैं उस भार्गव राम को प्रणाम करता हूँ, जो रेणुका माता के हृदय के आनंद हैं, जो संकट से मुक्त करते हैं, उपद्रवों का नाश करते हैं और क्षत्रियों का संहार करते हैं ।

भयार्तस्वजनत्राणतत्परं धर्मतत्परम् ।

गतगर्वप्रियं शूरं जमदग्निसुतं मतम् ॥ ३ ॥

जो भयभीत जनों की रक्षा में तत्पर रहते हैं, धर्म में रत रहते हैं, अहंकारहीन वीर हैं, और जमदग्नि ऋषि के सुपुत्र हैं- ऐसे प्रभु को मैं मानता हूँ ।

वशीकृतमहादेवं दृप्त भूप कुलान्तकम् ।

तेजस्विनं कार्तवीर्यनाशनं भवनाशनम् ॥ ४ ॥

जिन्होंने स्वयं भगवान महादेव को प्रसन्न किया, जो अहंकारी राजाओं के वंश का अंत करने वाले हैं, तेजस्वी हैं, कार्तवीर्य अर्जुन का नाश करने वाले हैं और सांसारिक दुखों का नाश करने वाले हैं।

परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः ।

रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम् ॥ ५ ॥

जिनके दाएँ हाथ में परशु और बाएँ हाथ में धनुष है, जो भृगु वंश के आभूषण हैं, घनश्याम वर्ण के और अत्यंत मनोहर स्वरूप हैं ।

शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं ।

रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम् ॥ ६ ॥

जो शुद्ध बुद्धि वाले, महान प्रज्ञावान, ज्ञान और युद्ध में पारंगत हैं, दत्तात्रेय की करुणा के पात्र हैं और ब्राह्मणों को प्रसन्न करने वाले हैं ।

मार्गणाशोषिताभ्ध्यंशं पावनं चिरजीवनम् ।

य एतानि जपेन्द्रामनामानि स कृति भवेत् ॥ ७ ॥

जिन्होंने अपने तीरों से समुद्र को सुखा दिया, जो पवित्र करने वाले हैं और अमरता प्रदान करने वाले हैं, जो भी इन श्रीराम के नामों का जप करता है, वह निश्चित रूप से पुण्यशाली बनता है ।

॥ इति श्री परशुराम स्तोत्र संपूर्णम् ॥

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